कई बार बच्चो को कुछ सिखाते सिखाते , हम भी ज़िन्दगी के कई पाठ पढ़ लेते है...आज भी कुछ ऐसा ही हुआ।
मैं मिष्टी को आज स्विमिंग कराने ले गयी। पिछले साल भी जाते थे। तब मिष्टी के पैर पूल के फ्लोर तक नही पहुंचते थे, इसलिए उसे ट्यूब के सहारे ही मेरे साथ बड़े पूल में रहना पड़ता। इस साल उसके पैर फ्लोर तक पहुंचते है या नही ये देखे बिना ही मैन उसे ट्यूब का सहारा लेने दिया। आज बहुत कोशिशों के बाद वो मानी कि बिना ट्यूब के उतरेगी। करीब 10 मिनट तक समझाने के बाद उसने अपने पांव फ्लोर पर रखे और बहुत डरते डरते मुझे छोड़ा।
अब बारी आई उसे पेट के बल लेटा कर स्विमिंग सिखाने की। पर फिर वही डर...बहुत समझाने पर वो सीधे तो हो गयी पर मेरा हाथ छोड़ने को तैयार ही नही हुई। मैं उसे लाख कहती रही कि "बेटे मैने तुझे नीचे से पकड़ रखा है ...तू डूबेगी नही..हाथ नही छोड़ेगी तो स्विमिंग कैसे सीखेगी...."
पर मिष्टी कहा मानती...न मिष्टी ने मुझे छोड़ा न स्विमिंग सीखी।
ज़िन्दगी भी कुछ ऐसी ही है...हम तैर सकते है....तैर कर बहुत कुछ पार कर सकते है पर बस हाथ छुड़ाना नही चाहते।
Wednesday, May 3, 2017
स्विमिंग पूल!
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True.... Loved reading that..... Felt as if it's mine story.... Remembered the scene when I was trying to teach swimming to my daughter
ReplyDeleteThanks Hemant :)
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