सर्दी की दोपहर में धुप सेंकने जाने से पहले मिष्टी और उसकी सहेली वेदिका ने बिलकुल पिकनिक की सी तैयारी कर ली। वेदिका ड्राइंग का सारा सामान ले आयी। मिष्टी ने अपना योगा मैट उठाया, कुछ गेम्स लिए और मुझे हिदायत दी गयी कि मैं पानी और कुछ खाने का सामान साथ ले आऊं।
ऐसे माहौल में मेरा भी मन कर गया धुप सेंकते सेंकते किताब पढ़ने का सो मैंने वाशिंग मशीन से कपडे निकालते निकालते मिष्टी से कहा ...
मैं - मिष्टी मेरी वो बुक भी ले लेना बेटे...
मिष्टी - कौनसी वाली?
मैं - वो जो बेड के साइड में रखी है..
मिष्टी - कैसी दिखती है???
क्योंकि अब मिष्टी को हिंदी भी पढ़नी आती है सो मैंने कहा -
मैं - उसपे "रोज़ एक कहानी" लिखी होगी।
मिष्टी - ओह्ह.... मंटो की बुक कहो न....
मैं - (गर्व से गदगद होते हुए ) हाँ मंटो :)
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