ये सवाल जेहन में अचानक उठा जब मैं और मिष्टी मृत्यु के बाद क्या होता होगा के बारे में बात करने लगे।
बात दरअसल जावेद अख्तर साहब और एक मौलवी की 'भगवान है या नहीं' की बहस देखने से शुरू हुई थी।
मिष्टी जिस उम्र में है, उस उम्र में मुझे भी लगता था कि मृत्यु के बाद क्या होगा यह पता भी चल जाए तो क्या? हम उस information का क्या ही कर लेंगे। जैसा उसे अभी लग रहा है।
पर आज समझ आता है कि इस उम्र तक आते आते यह सबसे बड़ा सवाल क्यों बन जाता है।
क्योंकि इस उम्र तक आते आते या तो आप मृत्यु चाहते हैं या नहीं चाहते। और ये clarity कि मृत्यु के बाद क्या होता है, आपकी चाहत को पुख्ता कर सकती है। आपके अपनों के जाने को भी आसान बना सकती है।
भगवान ने इंसान के जीवन काल का हर पहलू इतना खुला रखा कि उसे पता है कि पूरे जीवनकाल में कब, किस समय क्या होना है। कब बोलना है, कब उठकर चलना है, कब दूध से भात पर आना है, वगैरह वगैरह!
जिन चीजों का पता नहीं होता, वो भी किसी और के साथ घटित होता हुआ देखकर वह सतर्क रहता है और insurance जैसी तैयारी रखता है।
पर मृत्यु का उसे सिर्फ घटित होना पता है, उसके बाद का उसे कुछ नहीं पता। वह हर साल पितृ को खाना खिलाता रहता है।
पर कितना वेदनिय होगा मृत्यु के बाद भी खाने की राह देखना!
मृत्यु के बाद तो सब ख़त्म हो जाना चाहिए न? मैं इस तर्क को समझाने के लिए मिष्टी को मशीनों का उदाहरण देने लगी... कि भगवान को भी इंसानों की तरह बिल्कुल साफ़ साफ़ Expiry Date तय करनी चाहिए थी न? जैसे हम जानते हैं कि एक बार मशीन पूरी तरह बंद हो गई तो उसके बाद उसमें कभी जान नहीं आ सकती। उसका अस्तित्व पूरी तरह खत्म! कहानी खत्म और पूरी तरह से खत्म। ठीक इसी तरह इंसान मृत्यु के बाद बस खत्म। पूरी तरह खत्म। न आत्मा, न पितृ, न स्वर्ग, न नर्क! बस शेष! बस मुक्ति!
पर फिर अचानक मशीनों की गति का ख्याल आया। हम तो बस बंद पड़ने मशीनों को निकाल फेंकते हैं घर से। उसके बाद उसका क्या होता है, हमें क्या पता?
कोई कचरे के ढेर में, तो कोई समंदर में पड़ा रहता होगा युगों युगों तक। किसी के पुर्जे काम आ जाते होंगे किसी और मशीन के पुर्नजन्म के लिए। किसी के हिस्से क्या पता आ जाती होगी दोबारा ठीक होकर किसी और के घर की चाकरी करना। सब खत्म तो सिर्फ उसके लिए होगा जो biodegradable है। जो मिट्टी में गिरकर मिट्टी में मिल जाता होगा। यह समंदर में डूबकर, पानी में घुल जाता होगा। बस वही एक मुक्ति पाता होगा जो नश्वर यानी biodegradable है!
तो...
Am I Biodegradable?
ये सवाल जेहन में अचानक उठा जब मैं और मिष्टी, मृत्यु के बाद क्या होता होगा के बारे में बात करने लगे।